गीता महिमा

.. गीता महिमा ..

Gita Mahima

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वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम् .
देवकी परमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ..
मूकं करोति वाचालं पंगुं लंघयते गिरिम् .
यत्कृपा तमहं वन्दे परमानन्दमाधवम् ..

गीता हृदय भगवान का सब ज्ञान का शुभ सार है .
इस शुद्ध गीता ज्ञान से ही चल रहा संसार है .. १..

गीता परमविद्या सनातन कर्म शास्त्र प्रधान है .
परब्रह्मरूपी मोक्षकारी नित्य गीता-ज्ञान है .. २..

यह मोह माया कष्टमय तरना जिसे संसार हो .
वह बैठ गीता नाव में सुख से सहज में पार हो .. ३..

संसार के सब ज्ञान का यह ज्ञानमय भंडार है .
श्रुति उपनिषद वेदान्त-ग्रन्थों का परम शुभ सार है .. ४..

गाते जहां जन नित्य हरिगीता निरंतर नेम से .
रहते वहीं सुख-कन्द नटवर नन्द-नन्दन प्रेम से .. ५..

गाते जहां जन गीत-गीता प्रेम से धर ध्यान हैं .
तीरथ वहीं भव के सभी शुभ शुद्ध और महान हैं .. ६..

धरते हुए जो ध्यान गीता-ज्ञान का तन छोड़ते .
लेने उसे माधव-मुरारी आप ही उठ दौड़ते .. ७..

सुनते-सुनाते नित्य जो लाते इसे व्यवहार में .
पाते परमपद ठोकरें खाते नहीं संसार में ..८..

 


This is taken from Hari Gita, by Pandit Deena Nath Bhargava “Dinesh.” The uniqueness of the book is that it is in poetry, with one Hindi verse for each Sanskrit shloka.

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